जबलपुर: संजय गांधी वार्ड में एसआईआर अभियान बना मिसाल, पूर्व पार्षद राजू लईक 23 दिन से लगातार काम पर, हर समस्या का मौके पर समाधान

जबलपुर। मतदाता सूची के एसआईआर (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया पूरे शहर में जारी है। कई वार्डों में लोग नाम जुड़वाने, पता सुधारने और दस्तावेज जमा करने में परेशान हो रहे हैं, लेकिन संजय गांधी वार्ड में माहौल बिल्कुल अलग है। यहाँ पिछले 23 दिनों से पूर्व पार्षद राजू लईक खुद मैदान में उतरकर पूरी प्रक्रिया को सुचारू बना रहे हैं।

राजू लईक सुबह से रात तक गली-गली जाकर लोगों से मिल रहे हैं, उनकी समस्याएँ सुन रहे हैं और बीएलओ के साथ मिलकर मौके पर ही समाधान करा रहे हैं। उनका लक्ष्य है—वार्ड का एक भी मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।


वार्ड में लोगों को कौन-कौन सी दिक्कतें आ रहीं और कैसे हो रहा समाधान

पहली दिक्कत: नाम पहले था, अब गायब

कई लोग जो 20–30 साल से वहीं रह रहे हैं, जिनके घर परिवार ने हमेशा वोट डाला है, इस बार सूची में नाम गायब पाए गए।
क्या किया गया:
राजू और उनकी टीम बीएलओ के साथ घर पहुँचकर पुराने दस्तावेज देखते हैं, पता मिलान करते हैं और उसी समय नया फॉर्म भरवाकर जमा कराते हैं।


दूसरी दिक्कत: पुराने और नए पते में अंतर

कुछ घरों का पुराना पता और नया पता अलग लिखे जाने से सिस्टम में रिकॉर्ड नहीं मिल पा रहा।
समाधान:
टीम बिजली-पानी के बिल, राशन कार्ड और आधार कार्ड जैसे दस्तावेज देखकर सही पता दर्ज करवा रही है।


तीसरी दिक्कत: किराएदारों का नाम हट जाना

किराएदार अक्सर घर बदलते हैं, जिससे उनका पिछला रिकॉर्ड गड़बड़ा जाता है।
समाधान:
राजू की टीम किराएदारों से वर्तमान पता लेकर तुरंत फॉर्म भरवा देती है और बीएलओ को मिलान के लिए भेजती है।


चौथी दिक्कत: दस्तावेज़ों में छोटी-छोटी गलतियाँ

कई लोगों के नाम की स्पेलिंग अलग है, जन्मतिथि गलत है या माता-पिता के नाम में फर्क है।
समाधान:
राजू ने अपने कार्यालय में वकीलों की टीम बैठा दी है। वे वहीं पर दस्तावेज़ों की गलतियाँ सुधारते हैं और नया फॉर्म तैयार कर देते हैं। इससे लोगों को बार-बार दफ्तर नहीं जाना पड़ता।


पाँचवीं दिक्कत: मोबाइल से फॉर्म नहीं भर पाना

कई लोग ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पाते या एप्लीकेशन में दिक्कत आती है।
समाधान:
वार्ड ऑफिस में डिजिटल मदद उपलब्ध कराई गई है। टीम लोगों का फॉर्म खुद भरकर सबमिट करती है।


छठी दिक्कत: जमा किए गए फॉर्म भी सिस्टम में नहीं दिख रहे

कई नागरिक बताते हैं कि फॉर्म जमा करने के बाद भी डेटा “अनमैप्ड” दिखता है, यानी सिस्टम से जुड़ नहीं पाता।
समाधान:
राजू रोज़ BLO और ERO से संपर्क कर ऐसे फॉर्म की स्थिति जांचते हैं और तुरंत दोबारा अपलोड या संशोधन करवाते हैं।


राजू लईक ने कार्यालय को बनाया ‘सहायता केंद्र’

संजय गांधी वार्ड में दिनभर बीएलओ आते-जाते हैं।
राजू लईक का कार्यालय एक अस्थायी सहायता केंद्र की तरह काम कर रहा है—जहाँ लोगों के दस्तावेज चेक होते हैं, समस्याएँ सुनी जाती हैं और वहीं पर समाधान कराया जाता है।

लोगों का कहना है कि उन्हें अब किसी सरकारी दफ्तर के चक्कर नहीं लगाना पड़ रहा। सबसे बड़ी राहत यह है कि हर व्यक्ति का काम उसी दिन हो जाता है।


“मतदाता सूची में एक भी नाम छूटना नहीं चाहिए”—राजू लईक

राजू लईक का कहना है—

“मतदाता का नाम सिर्फ एक प्रविष्टि नहीं, यह लोकतांत्रिक अधिकार है। हम उस अधिकार की रक्षा कर रहे हैं। जब तक वार्ड का हर नाम फाइनल लिस्ट में नहीं आ जाता, हमारी टीम काम छोड़ने वाली नहीं है।”


नतीजा: संजय गांधी वार्ड बना शहर का सबसे सक्रिय वार्ड

जहाँ शहर के कई हिस्सों में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर शिकायतें मिल रही हैं, वहीं संजय गांधी वार्ड में यह काम तेजी और पारदर्शिता से हो रहा है।
लोगों का भरोसा बढ़ा है कि उनका नाम ज़रूर जुड़ेगा और उनका वोट किसी हालत में नहीं छूटेगा।

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