सोशल मीडिया की ज़हर घोली सियासत से उबला जबलपुर का मुस्लिम समाज
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जबलपुर। “बाबा… हम शर्मिंदा हैं…”
ये सिर्फ़ एक जुमला नहीं, बल्कि आज के मुस्लिम समाज के दिल की चीख़ है। वह चीख़, जो उस दिन उठी जब लोगों ने देखा कि जिन बुजुर्गाने दीन ने अपने पूरे जीवन को इंसानियत और इबादत के लिए वक्फ़ कर दिया — उन्हीं की पाकीजा ज़िंदगी को आज सोशल मीडिया पर निशाना बनाया जा रहा है।

हाजी सुब्हानल्लाह शाह बाबा रहमतुल्लेह अलैहे सिलसिले के अज़ीम सूफी बुज़ुर्ग हज़रत मोहम्मद हसन साधू बाबा रहमतुल्लाह अलैहे, जिनका विसाल 1999 में 95 वर्ष की उम्र में हो चुका है, आज भी हजारों दिलों में जिंदा हैं। लेकिन उनके इंतकाल के पूरे 26 साल बाद, कुछ मुस्लिम लड़कों के द्वारा सोशल मीडिया पोस्टों के ज़रिये उनकी यादों, किरदार और रूहानी शख़्सियत पर कथित रूप से कीचड़ उछाला जा रहा है — और यही बात पूरे मुस्लिम समाज को हिला देने वाली बन गई है। लगाए गए आरोपो के सार इतने घटिया और घिनौने हैं की उन्हें लिखना भी बुजुर्गाने दीन की अजमत के खिलाफ है।

“हमने हर दौर की सियासत देखी… पर ये दौर सबसे जहरीला”
जबलपुर मुस्लिम समाज के बुज़ुर्गों और युवाओं के बीच एक ही चर्चा है —
समाज ने राजनीति के तमाम घटिया दौर देखे हैं, आरोप-प्रत्यारोप देखे हैं, लेकिन ऐसा दौर कभी नहीं देखा गया, जहाँ 26-26 साल पहले दुनिया छोड़ चुके बुज़ुर्गों की कब्रों को सोशल मीडिया पर खोदकर उन पर कीचड़ उछाली जा रही हो।
लोगों का कहना है कि अगर किसी से राजनीतिक या व्यक्तिगत विरोध है, तो जीवित लोगों से हो, मगर मरहूम औलिया-ए-कराम की इज्ज़त और आबरू पर हमला करना न इंसानियत है, न तहज़ीब, न ही इस्लाम की तालीम।
सोशल मीडिया पर फैली पोस्टों से भड़की भावना
बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साधू बाबा के खिलाफ कथित तौर पर बेहद अभद्र, घिनौनी और आपत्तिजनक सामग्री साझा की गई। जैसे ही यह बात लोगों तक पहुंची, समाज के हर तबके में ग़म और ग़ुस्सा फैल गया।
लोगों का कहना है —
“आज हम वो बातें सुनने को मजबूर हो रहे हैं, जो हम किसी दुश्मन के लिए भी बर्दाश्त नहीं करते। जिन बुज़ुर्गों ने हमें दूसरों की इज्ज़त करना सिखाया, आज उन्हीं की इज्ज़त को हमारे बीच के लोग रौंद रहे हैं।”
हनुमानताल थाने में हुई एफआईआर …

इस पूरे मामले को लेकर जबलपुर के हनुमानताल थाने में बड़ी संख्या में लोगों ने एकत्र होकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। लगभग 250 से अधिक लोगों ने एक सुर में मांग की कि सोशल मीडिया पर हजरत मोहम्मद हसन साधू बाबा रहमतुल्लह अलैहे के खिलाफ नफरत और अपमान फैलाने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
हनुमानताल थाने में प्रदर्शन और शिकायत के दौरान वरिष्ठ पार्षद अख्तर अंसारी, वरिष्ठ समाज सेवी हाजी इसरार अहमद, क्षेत्रीय पार्षद समरीन कुरैशी, पार्षद शमा मतीन, पूर्व पार्षद सैय्यद ताहिर अली, एमआईएम के वरिष्ठ नेता सरफराज खान, कांग्रेस नेता याकूब अंसारी, सईद कूलर, निहाल मंसूरी, अराफ़ात खान,अनवर मंसूरी, हारून कपड़ा वाले, एडवोकेट हफीज खान, एडवोकेट शकील खान, एडवोकेट अहमद अंसारी, मो. इस्लाम, सिराज अंसारी, हामिद, नवाब भाई, हाफ़िज निजामुद्दीन साहब, अमीन कांच वाले, अनवार हेड वाले, इस्माईल बेल्डर, अबरार ,रफ़ीक़ पहलवान, शारिक अली सोनू, शेरू ,अरशद, कासिम भाई, फैजान, नादिर साहब, साबिर अहमद सहित 250 से अधिक आम जन मौजूद थे.
प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा यह मामला किसी एक इंसान का नहीं, बल्कि औलिया-ए-किराम की शान, सूफी परंपरा और पूरे मुस्लिम समाज की रूहानी विरासत का है।

“ये सिर्फ साधू बाबा रह.की बात नहीं है”
हनुमानताल थाने में शिकायत देने गये लोगों ने कहा कि अगर आज खामोशी बरती गई, तो कल किसी और बुज़ुर्ग, किसी और मज़हबी रहनुमा की यादों पर हमला होगा। इसलिए यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं, बल्कि इंसानियत, तहज़ीब और अदब को ज़िंदा रखने की लड़ाई है।
बुजुर्गों की समाज की अपील
इस पूरे घटनाक्रम के बाद मुस्लिम समाज के जिम्मेदार लोगों ने युवाओं से अपील की है कि वे अफवाहों से दूर रहें, किसी भी भड़काऊ पोस्ट को शेयर न करें और मामले को कानूनी दायरे में रहकर आगे बढ़ाएं।
साथ ही प्रशासन से भी मांग की गई है कि मामले की निष्पक्ष और तेज़ जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि समाज के दिलों पर लगा यह ज़ख्म कुछ भर सके।
